बिहार सरकार के लकवा ग्रस्त सिस्टम के आगे भूखों मरने पर विवश अग्नि पीड़ित, हमारी एक अपील है आप पाठकों से

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ऐसे समय में यहाँ के लोगों के साथ भगवान ने क्रूर मजाक किया जब कोई राजनेता भी मदद नहीं कर सकता…
हमारी अपील है आप सभी से,इस समय पीड़ित परिवारों की मदद को बढ़ाएँ हाथ…
वैशाली के महनार से ग्राउंड ज़ीरो रिपोर्टिंग… 
कहां से लिखना शुरू करू आज एक बार फिर समझ नही आ रहा है। आखिर आये भी कैसे जब सारी सरकारी योजनाये यहां आ कर शून्य हो जाती हो। दरअसल हम बात कर रहे है कल हुये महनार के देशराजपुर मे भीषण अगलगी की। इस अगलगी मे सरकारी आकड़ो के अनुसार नौ परिवारो का सब कुछ जलकर राख हो गया। अगलगी मे हुये क्षति का जायजा और राहत बचाव का हाल जानने हम पहुचे ग्राउंड जिरो यानि अगलगी स्थल पर जब हम पहुचे उस वक्त दोपहर 11:30 हो रहा था। हमारे साथ हमारे पत्रकार साथी विजय मेहता भी थे। यहां का नजारा देखने के बाद सही मायने मे पता चला कि इस आग ने इन नौ परिवारो का सब कुछ छीन लिया। कपड़ा ,सामान के साथ ही अनाज का एक दाना भी इन परिवारो के पास नही था।  आस पड़ोस के लोग चुड़ा दिये थे,वही एक कटोरा मे लिये। एक तीन चार साल की बच्ची खा रही थी।
https://youtu.be/ujwBIEQPHEM
ये सब देख ही रहा था कि अचानक नजर एक बांस पर काले रंग का पन्नी टंगा था।  उधर गया वहा एक महिला बच्चे को गोद मे लिये थी ,और बच्चा भूख से बिलख बिलख कर रो रहा था। वही पास बैठी एक बूढ़ी माता माथे पर हाथ रखे टकटकी लगाये देख रही थी। इस उम्मीद के साथ कि कोई सरकारी बाबू है कुछ लेकर आया है। जैसे ही आगे बढ़ा,वह बुढ़ी जोर-जोर से रोने लगी, कहने लगी, कहां से लाईयो खाता बही आ पासबुक सब कुछ तअ जर गेल हम केकरा से मांगीयई कागज पत्तर……… बुढ़ी औरत के साथ ही वहां आस-पास बैठा बच्चा भी रोने लगा। यह स्थिति वास्तव मे हृदय विदारक था।  कुछ देर बाद जब वह बुढ़ी शांत हुई तो हमने उनसे सवाल किया कि कौन मांगा खाता पासबुक और आधार कार्ड ?  तो उन्होने जवाब दिया कि बड़का हाकिम सब आएल रहथिन, सब चारो ओर घूम घूम क देखलथिन आ कहलथिन कि आग मे जर गेलो हअ, ओकरा रहे, खाएला बर्तन बासन खरीदे ला सरकार अब खाता मे पैसा देतो। ऐहे लेल खाता पासबुक, आधार कार्ड देबई तभीये सरकार पैसा देतई।  ईतना कह कर बुढ़ी औरत ने हम से सवाल पुछा अब तू ही बता बउआ जब सब कुछ आग मे जर गेलई तअ ई कागज पत्तर कहां से हम लबई।
अब तक वहां पर सभी अग्नि पिड़ित परिवार पहुच गये थे। सबो का हाल बेहाल था। खासकर बच्चे और बुढ़ो का हालत सबसे ज्यादा खराब था। वहां मौजूद अन्य लोगो ने बताया कि कल कई हाकिम लोग आये थे। खड़ा होकर फोटो खीचवाये और हम लोगो का भी फोटो खीच कर बोले,सब लोग बैंक खाता , आधार कार्ड , और वोटर आई कार्ड दिजीये, सब के खाते मे राहत राशि भेजा जायेगा।  इस पर सभी लोगो ने बताया कि हमारा तो सब कुछ जल गया तो अभी हम खाता बही कहां से लायेगे ? उसके बाद हाकिम लोग गाड़ी मे बैठे और चले गये।  कल दोपहर मे काला रंग का पन्नी लेकर कोई ब्लौक से आया और हमलोगो को नौ पन्नी देकर चला गया और कहा कि जब तक पासबुक आधार कार्ड नही दिजीयेगा तब तक राहत राशी नही मिलेगा। तब से लेकर अब तक ये लोग वही पन्नी टांग कर बच्चो के साथ हैं। आस पास के लोगो द्वारा चुड़ा-गुड़ दिया गया है, जिसके सहारे ये नौ परिवार चल रहा है। अब आप ही बताईये इसे सिस्टम का मजाक नही तो और क्या कहा जाये ? जिसका सब कुछ जल गया हो उससे आप कह रहे हो कि आप पास बुक, आधार कार्ड लाईये ?
खैर मै उन अधिकारियो पर सवाल नही उठा रहा हूं।  हमारा सवाल सिस्टम से है। भूखमरी के तहत अन्नकलश योजना भी है जिसे इन परिवारो को दिया जा सकता है। खैर ये तो है सरकारी सिस्टम की बात। कम से कम समाज के समृद्ध लोगो को ही आगे आ कर इस तरह के लोगो को मदद करना चाहिये।  तो आईये हम सब मिल कर इस तरह के पिड़ित परिवारो को मदद करे। हाँ, आपके मन मे आ रहा होगा कि हमने क्या किया ? तो आपको बता दे हम से जो संभव था वह उन पिड़ित परिवारो केलिये किया है। अब आपकी बारी है तो आईये और एक कदम बढ़ा कर मदद किजीये। 

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