धरती के पहले राजनेता जो भगवान के लिखे को मिटाने का दावा करते 

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आजमगढ़ से भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ

अब तक राजनेता भाषा की मर्यादा तोड़ते थे,लेकिन निरहुआ भगवान के लिखे को भी मिटाने का दावा करते… 

  
पटना:छठे चरण में सात राज्यों के 59 लोकसभा सीटों पर 12 मई को मतदान समाप्त हो चुका है। इस लोकसभा चुनाव में पुरे देश में सात चरणों में मतदान संपन्न होना है । अंतिम सातवें चरण का मतदान 19 मई को होगा । 23 मई को रिजल्ट भी आ जायेगा। लेकिन अब तक इस बार के चुनाव में किसी राजनेता ने ऐसा बयान नहीं दिया, जैसा बयान भोजपुरी फिल्मों के कलाकार रहे दिनेश लाल यादव निरहुआ ने दिया है। आठ दिनों के राजनेता निरहुआ ने एक निजी न्यूज़ चैनल से बातचीत में कहा की वह ईश्वर के लिखे को भी मिटा सकता। उसे इस चुनाव में हराने वाला कोई पैदा ही नहीं हुआ है। अब तक के चुनावी दौर में राजनेता भाषाओँ की मर्यादा को तोड़ते रहे हैं। लेकिन निरहुआ जैसे राजनेता भगवान को चुनौती देने में भी पीछे नहीं रहते।
दिनेश लाल यादव निरहुआ उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में थे। आजमगढ़ समाजवादी पार्टी का अब तक गढ़ रहा है। इस शीट से समाजवादी पार्टी से उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुनावी मैदान में थे। हालांकि निरहुआ ने जिस तरह दावा किया की वह भगवान के लिखे को भी मिटा सकता,उसे हारने वाला कोई पैदा नहीं हुआ। इस तरह का बयान अब तक नरेंद्र मोदी ने भी नहीं किया। हाँ सर्वाधिक शीट पर जीत का दावा सभी राजनेता जरूर करते। निरहुआ ने जिस तरह इस चुनाव में बयान दिया,इसके पीछे निरहुआ की मंशा क्या थी इसका जबाब निरहुआ ही दे सकते। ऐसे अपने नाम की चर्चा के लिए समय-समय पर राजनेता बेतुका बयान देते रहते। लेकिन भगवान के लिखे को मिटाने वाला इस धरती पर निरहुआ शायद पहले राजनेता हो? इस चुनाव में सांसद प्रत्याशी से ही निरहुआ के राजनीतिक जीवन की शुरुआत है।

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