दादा के श्राद्ध के दिन दो बच्चों की नदी में डूबकर मौत,आपदा प्रबंधन विभाग की लापरवाही हुई उजागर

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हाजीपुर:बिहार के हाजीपुर में एक परिवार के साथ ऐसी विपदा आई है की जो भी इस घटना को सुन रहा स्तब्ध हो जा रहा। पूरा मामला हाजीपुर के नगर थाना क्षेत्र का है। नगर के राजेंद्र चौक स्थित डाबर गली का तीन युवक जो तीनों आपस में चचेरे भाई हैं, आज नगर के क्लब घाट स्थित गंडक नदी में नहाने चला गया। तीनों जब नदी में नहा रहा था तभी तीनों डूबने लगा। जिसके बाद सभी ने चिल्लाकर बचाओ-बचाओ करने लगा। तीनों के चिल्लाने पर नदी किनारे खड़े मुन्ना कुमार नामक व्यक्ति ने अपने पास का गमछा फेका,जिसे पकड़कर टिक्कू नामक युवक बच गया। लेकिन टिक्कू का चचेरा भाई योगेंद्र और आदित्य पुरानी गंडक पुल के पास आकर डूब गया।
NDRF की लापरवाही पर आक्रोशित लोग
तीनों चचेरे भाई के चचेरे दादा अशोक सिंह का आज श्राद्ध था। जिसमे शामिल होने पुरे परिवार के लोग हाजीपुर आए थे। गम में शामिल होने आए परिवार के लोग यहाँ आकर इस घटना के बाद और शोक में पड़े हैं। डूबने वालों में संजय सिंह का 21 वर्षीय पुत्र आदित्य कुमार और विजय सिंह का 17 वर्षीय पुत्र योगेंद्र कुमार शामिल है। वहीं तीसरा चचेरा भाई जो डूबने से बच गया वह सुशील सिंह का पुत्र टिक्कू है। यह परिवार हाजीपुर नगर परिषद् क्षेत्र के वार्ड नंबर 18 के पार्षद अमित कुमार सिंह का है। इस घटना के बाद पूरा परिवार स्तब्ध है। सबसे बुरी स्थिति घर के बुज़ुर्गो और डूबने से मरे दोनों बच्चो की माँ की है। आज दोनों बच्चों के शव को गोताखारों द्वारा खोजने का प्रयास किया गया,लेकिन किसी का शव बरामद नहीं किया जा सका।
घटना की जानकारी पर घाट पर पहुंची पुलिस और परिवार के लोग
गुजरात के सूरत की घटना की हुई पुनरावृति… 
गुजरात के सूरत शहर स्थित तक्षशीला कॉम्प्लेक्स में आग लगने पर जैसे मासूम बच्चे अपने को बचाने के लिए चौथे मंजिल से छलांग लगाने से 22 बच्चो की मौत हो गई। गुजरात सरकार के पास आपदा से निबटने के लिए अविलम्ब कोई व्यवस्था नहीं थी। आगलगी की सुचना के 45 मिनट बाद दमकल पहुंची। जबकि उसका दफ्तर काफी नजदीक है। आग पर काबू पाने गई दमकल को 28 किलोमीटर दूर से पानी लाने में विलम्ब हुआ। दमकल के पास चौथे मंजिल पर पहुंचने के लिए सीढ़ी नहीं था। इसी तरह की लापरवाही हाजीपुर में इन दोनों बच्चों की डूबने के बाद आपदा प्रबंधन विभाग की उजागर हुई है। घटना की सुचना पर पहुँची NDRF की दो टीम पहुँची। लेकिन दोनों टीम की बोट में पेट्रोल नहीं था। बोट को स्टार्ट करने के लिए पेट्रोल लाने में 40 मिनट का समय लग गया। जब NDRF की बोट में पेट्रोल नहीं रहता तो किसी भी घटना से तत्काल निबटने के लिए बिहार सरकार की यह आपदा प्रबंधन विभाग कैसे काम करेगी ?

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