बिहार पुलिस की गुंडागर्दी नेशनल स्तर पर सवालों के घेरे में,जो खड़ा नहीं हो सकता उसे SHO ने किया नामजद

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नीतीश सरकार के पुलिस की गुंडागर्दी नेशनल स्तर पर सवालों के घेरे में,जो खड़ा नहीं हो सकता उसे SHO ने किया नामजद…
पटना/हाजीपुर:देश में पुलिस विभाग हमेशा अपने कारनामों से चर्चा में रहती है। इसमें बिहार पुलिस भी पीछे नहीं है। बिहार पुलिस तो इस कदर अपनी कार्यशैली से चर्चा में रहती की शराबबंदी के बाद दो बार बिहार के पुलिसवाले शपथ ले चुके की वह शराब नहीं पीयेंगे। और शपथ लेने के महज कुछ घंटों बाद ही नौगछिया के खरीक थानाध्यक्ष अपने ही थाना में शराब पीते गिरफ्तार होता है। उत्तर बिहार में अब तक करीब 200 मासूमों की मौत बिहार सरकार के कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। हर साल उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर में मासूमों की मौत सरकार की लापरवाही से होती है, और मुजफ्फरपुर का लीची यूँही बदनामी का दाग राष्ट्रीय स्तर पर अपने ऊपर लेता है। इन सबके बीच सरकारी संवेदनहीनता की एक ऐसी तस्वीर वैशाली से आई है, जो सुशासन के दावे वाले नितीश कुमार के सुशासन के दावों की पोल राष्ट्रीय स्तर पर खोलते हुए नीतीश के पुलिसवाले की गुंडागर्दी बता रही है।
वैशाली के भगवानपुर प्रखंड के हरवंशपुर गांव के पाँच बच्चों की मौत कथित चमकी चमकी बुखार से हो गई। इलाके में बच्चों की मौत और पानी की समस्या को लेकर बीते 18 जून को स्थानीय लोगों ने NH-77 पटना- मुजफ्फरपुर मुख्य मार्ग को जाम कर दिया था। उसी दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों को देखने जाने का दौरा था। इस सड़क जाम करने के मामले में भगवानपुर थाना प्रभारी संजय कुमार ने उसी दिन अपने थाना में अपने बयान पर सड़क जाम करने के मामले में 19 लोगों को नामजद और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ भगवानपुर थाना कांड संख्या 137/19 दर्ज किया।
भगवानपुर थाना में दर्ज कांड संख्या 137/19 में जिस 19 नामजद लोगों का नाम है उसमे से 12 नंबर पर नामजद राजेश सहनी की 7 वर्षीय बेटी रूपा कुमारी की मौत कथित चमकी बुखार से हो चुकी है। 14 नंबर पर रामदेव सहनी को पुलिस ने नामजद अभियुक्त बनाया है। रामदेव सहनी के बच्चे की मौत भी कथित चमकी बुखार से हो चुकी है। 15 नंबर पर नामजद अभियुक्त शत्रुधन सहनी है, जो बोल नहीं सकता,स्वयं खड़ा नहीं हो सकता , विकलांग है। उस शत्रुधन सहनी को भी भगवानपुर थानाध्यक्ष संजय कुमार ने नामजद अभियुक्त बना दिया।
चमकी और एन्सेफेलाइटिस से जिन लोगों ने अपने बच्चों को खोया उन लोगों के खिलाफ पुलिस के FIR के बाद पुरे गाँव में हड़कंप मचा है।  लोग पुलिस की गुंडागर्दी से गांव छोड़कर भागने पर विवस हैं। इस गाँव के लोग नीतीश कुमार से बीमारी का इलाज और पीने का पानी मांगने गए थे। लेकिन बदले में नीतीश सरकार की पुलिस ने गाँव के लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया।
सड़क जाम जैसे अन्य मामलो में पहले से नामजद हुए लोग बताते हैं की अक्सर थानाध्यक्ष ऐसे मामले में थाना के किसी मुंशी को इलाके में भेजकर या अपने मुखबिर से गांव के कुछ लोगों का नाम मांगकर उन्हें नामजद अभियुक्त बनाते हुए मुकदमा दर्ज कर लेते हैं। नामजद अभियुक्त जब अपनी बेगुनाही का सबूत पुलिस को देता है तो पुलिस पैसा लेकर उनलोगों का नाम काट देती है। सड़क जाम के मामले में पुलिस इसी तरह नाजायज लोगों का नाम दर्ज कर अवैध उगाही करती है। जिसका उदाहरण हरवंशपुर का यह मामला है। यह मामला तब खुल पाया जब देश की खबरिया न्यूज़ चैनल उत्तर बिहार के कथित चमकी बुखार में सैकड़ो मासूमों की मौत पर लगातार खबर कर रही है। चमकी बुखार से मरे बच्चो के परिजनों को जब पुलिस ने नामजद अभियुक्त बनाया है तब यह पुलिस का खेल खुल सका है।

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