अपने ही थाना में अपने और एक अन्य SHO के खिलाफ करनी पड़ी हत्या की FIR,फरार चल रहे SHO को एसपी ने किया सस्पेंड

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पटना:सुशासन वाले बिहार में अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा। हर रोज लूट-हत्या बिहार में आम बात हो गई है। इन मामलों के अलावे बिहार पुलिस भी अपनी कार्यशैली को लेकर हमेशा से सुर्खियों में रही है। एक ताजा मामला रोहतास जिले का है। रोहतास पुलिस कप्तान सत्यवीर सिंह ने इंद्रपुरी थानाध्यक्ष दीपक कुमार झा समेत 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया है। बीते 20 अगस्त को ट्रैक्टर चोरी के आरोप में तिलौथू थाना क्षेत्र के हुरका निवासी श्रीकांत सिंह को गिरफ्तार किया गया था। श्रीकांत को तिलौथू और इंद्रपुरी थानाध्यक्ष ने रात में घर से गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तार करने के बाद उसे इंद्रपुरी थाना के हाजत में रखा गया। जहाँ उसकी मौत हो गई। इस मामले में मृतक के पिता शंकर सिंह ने तिलौथू थाना में आवदेन देकर तिलौथू और इंद्रपुरी थानाध्यक्ष के ऊपर हत्या का आरोप लगाया। तिलौथू के प्रभारी थानाध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह ने मृतक के पिता के बयान पर अपने को और इंन्द्रपुरी थानाध्यक्ष दीपक कुमार झा को हत्या का आरोपी बनाते हुए इंडियन पेनल कोड की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था। मुकदमा दर्ज करने के बाद से इंद्रपुरी थाना अध्यक्ष दीपक कुमार झा फरार चलने लगे।
श्रीकांत सिंह की मौत मामले में श्रीकांत के पिता शंकर सिंह ने थानाध्यक्ष तिलौथू के नाम दिनांक 21 अगस्त को आवेदन देकर बताया था कि तिलौथू थानाध्यक्ष और इंद्रपुरी थानाध्यक्ष 20 अगस्त की रात्रि करें 8:30 बजे उसके बेटे को घर से गिरफ्तार कर ले गए और इंद्रपुरी थाना के हाजत में बंद कर दिया। दोनों थानाध्यक्ष से पूछने पर बताया गया कि उनके बेटे के खिलाफ चोरी का मुकदमा है। अगले दिन शंकर सिंह अपने परिवार के साथ इंद्रपुरी थाना गए तो बताया गया कि उनके बेटे की मौत हाजत में हो गई है। शंकर सिंह ने आरोप लगाया था की दोनों थानाध्यक्षों ने एकमत होकर बुरी तरह से मारपीट कर हत्या कर दिया।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मुख्यालय डीएसपी लक्ष्मण प्रसाद ने जिला पुलिस कप्तान सत्यवीर सिंह के निर्देश पर इस मामले में अनुसंधान शुरू किया। इस घटना ने पूरे पुलिस महकमे की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। इस मामले में फॉरेंसिक की टीम भी पटना से रोहतास जाकर इस मामले की जांच की थी। थाना हाजत में हुए इस मौत मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया था।

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