बिहार के प्रसिद्ध शिव मंदिर,जहाँ सावन में जुटती थी अप्रत्याशित भक्तों की भीड़ वहाँ कोरोना काल में पसरा है सन्नाटा 

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अनूप नारायण सिंह…
बाबा गरीबस्थान , मुजफ्फरपुर 
■मुजफ्फरपुर का गरीब नाथ मंदिर में हर साल सावन में लाखो श्रद्धालु कावड़ ले के आते है। बाबा के भक्त सारण के सोनपुर प्रखंड के पहलेजा घाट से दक्षिणवाहिनी गंगा का पवित्र गंगा जल लेकर सोनपुर-हाजीपुर के रास्ते 65 KM की यात्रा नंगे पाँव पूरी कर के बाबा को जल चढ़ाते है। यह बिहार की सबसे लम्बी दुरी की कावड़ यात्रा है।
हरिहरनाथ, सोनपुर 
■हरिहर नाथ, पावन नारायणी नदी के तट पे भगवान हरी और हर का एक पौराणिक मंदिर है। यहाँ पौराणिक कथा के अनुसार गज और ग्राह की लड़ाई हुए थी, जिसमे खुद भगवान् विष्णु गज की पुकार पर आकर गज की सहायता की थी। बाबा गरीब नाथ कावड़ ले के जाने बाले श्रद्धालु हरिहरनाथ पर जल चढ़ाना नहीं भूलते।  कार्तिक पूर्णिमा से लगभग एक महीने के लिए यहाँ मेला लगता है। यह मेल सोनपुर मेला या छत्तर मेला के नाम से मसहूर है।
बाबा पातालेश्वरनाथ, हाजीपुर 
■ज़मीन के अंदर से शिव लिंग मिलने के कारण इस मंदिर का नाम बाबा पातालेश्वरनाथ है। हाजीपुर शहर के लोग बाबा पातालेश्वरनाथ को नगर महादेव कहते हैं। सावन में मंदिर प्रांगण में हर सोमवार को सोमवारी मेला लगता है।  शहर के कई जगहों में बच्चे अपने घर के आगे आकर्षक सोमवारी सजाते है। शिवरात्रि पर यहाँ एक झांकी निकाली जाती है जो पतालेश्वर मंदिर से शुरू होती है। इस झांकी में बाबा पातालेश्वरनाथ के गाड़ीवान विद्यार्थी जीवन से ही हाजीपुर निवासी वर्तमान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय बनते हैं।
HAJIPUR
ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर, बक्सर 
■ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर बक्सर जिले में स्थित है। ब्रह्मपुर का मतलब संस्कृत में “ब्रह्मा के शहर” है। भगवान शिव का शिवलिंग सैकड़ों वर्ष पुराना है। ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर के कारण इस जगह का नाम ब्रह्मपुर पर है।
शिव मंदिर बराबर, मखदुमपुर 
■गया से लगभग 24 KM दूर मखदुमपुर जिला में एक पहाड़ी पर यह मंदिर है। ऐसे बराबर अपने पौराणिक गुफा के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। सावन के महीने में श्रद्धालु यहाँ यहाँ आकर भगवान् शिव पर जल चढ़ते हैं। अब तो पहाड़ी ले जाने के जिए सीढ़िया बन गए है, जिससे श्रद्धालु के यहाँ आने में परेशानी कम गई है, लेकिन जब सीढ़िया नहीं थी और यहाँ आने के लिए पास के रेलवे स्टेशन बेला से पैदल चल कर आना पड़ता था, तब भी उनका उत्साह कम नहीं होता था। उस समय लोग अपने साथ खाने का सामन और पीने के लिए पानी ले के आते थे और रात्रि में लोग यही रुकते थे। पर अब सुबिधा बढ़ गए है। पास के स्टेशन बेला और मखदुमपुर से यहाँ आने के लिए सवारी गाड़ी मिल जाती है।
■कैमूर जिला में मुंडेश्वरी पहाड़ी पे मुंडेश्वरी मंदिर है! यहाँ भगवान शिव और माता सकती की पूजा होती है। यह बिहार का सबसे पुराना मंदिर है। नवरात्री में यहाँ में मेला भी लगता है।
■मधुबनी से 9KM दूर एक छोटे से गाँव में भगवान शिव का है। कपिलेश्वर मंदिर के कारण ही इस गांव कपिलेश्वर पड़ा। विशेष रूप से श्रावण के महीने के दौरान सोमवार को असाधारण भीड़ होती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में एक बहुत बड़ा मेला लगता है।
■खुदनेश्वर मंदिर समस्तीपुर जिला के मोरवा में है। इस मंदिर का नाम एक मुस्लिम औरत खुदनी के नाम पर है जिसे शिव लिंग 14 वी शताब्दी में मिला था। अभी जो मंदिर है उसे नरहन एस्टेट के द्वारा 1858 में बनाया गया था।
MORWA,SAMASTIPUR

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