वो तो है अलबेला हजारो में अकेला,बिहार की अवाम का है हरदिल अज़ीज़ DGP गुप्तेश्वर पांडेय

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वर्त्तमान समय मे एक वायरल ऑडियो ने पुनः इस बात को साबित किया है कि बिहार को एक विरला और अद्वितीय DGP मिला है।
जरा सोचिए… 
क्या कभी बिहार की आबादी खातिर गुप्तेश्वर पांडेय से पूर्व किसी DGP ने नम्बर जारी किया था? जवाब होगा नही कभी नही…
पुलिस मुख्यालय की तमाम सुविधाओं वाले अपने कक्ष से आम बिहारी के दरवाजे तक कोई भी डीजीपी गया क्या?
जवाब होगा नही कभी नही…
पूस की रात हो या जेठ की गर्मी या फिर बरसते बादलों का स्वयंबर जो कल तक महकमे का मुखिया कहलाता था, आम आदमी का डीजीपी बनकर बिहार के कोने-कोने में पहुचता रहा। क्या कभी किसी भी DGP ने ये किया जवाब होगा नही कभी नही…
उम्र के इस पड़ाव में जब कोरोना का कहर अपने तीसरे चरण यानी कॉम्युनिटी ट्रांसमिशन के दौर में है। WHO की सख्त हिदायत (10 से कम उम्र के बच्चे और 55 वर्ष के ऊपर के व्यक्ति) के बावजूद अवाम की खिदमत खातिर हर माध्यम से DGP प्रयासरत है। क्या कभी किसी DGP में इतनी व्यकुलता और जुनून अवाम खातिर अपने सुना या देखा जवाब होगा नही कभी नही…
दरअसल, प्रसाशनिक नियमन के तहत पुलिस का मुखिया बनने वाला शख्स उम्र के उस पड़ाव में होता है जब वो रिटायरमेंट की नज़दीक होता है। उसके अंदर तय मानक को पूरा कर विदाई लेने की और सियासी जुगलबंदी को ध्यान में रखकर कर कल की भी चिंता करनी होती है। लेकिन वर्त्तमान DGP की सक्रियता और जुनून किसी युवा IPS से कम है क्या? जवाब होगा नही कभी नही…
कोरोना काल मे जब तमाम सरकारी इदारों के नंबर जब या तो सदैव इंगेज रहते है या स्विच ऑफ … बिहार के DGP का फ़ोन 24 घण्टे चालू रहता है ताकि आवाम चैन की नींद सो सके .. ये महज शब्दावली नही एक हकीकत है जिसका प्रमाण ढूढने की आवश्यकता नही है। क्या कभी ऐसा हुआ है पूर्व जवाब होगा नही कभी नही…
वायरल ऑडियो भी इस बात की गवाही देता है कि बिहार का DGP पल-पल हर पल सक्रिय है, ताकि बिहार की पब्लिक चैन से सो सके .. क्या कभी इसी शिद्दत और दीवानगी अवाम खातिर अपने देखा है –जवाब होगा नही कभी नही…

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