माटी की खुशबू से लबरेज होते हैं लोकगीत : नीतू नवगीत 

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लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत
नई दिल्ली/पटना
प्रेरणा दर्पण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच के तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत ने बिहार के पारंपरिक गीतों की अद्भुत छटा बिखेरी । कार्यक्रम में बिहार के पारंपरिक गीतों के बारे में नीतू नवगीत ने कहा कि ये लोकगीत हमारी विरासत का महत्वपूर्ण  अंग हैं और हमें अपनी जमीन से जोड़ कर रखते हैं । इन गीतों में मां की लोरी का प्यार है तो गांव से चलने वाली बयार है ।
लोकगीत हमें गांव की माटी की सोंधी खुशबू से जोड़ते हैं और हमें पुरखों की याद दिलाते हैं । कार्यक्रम में लोक गायिका नीतू नवगीत ने स्वरचित जागरूकता गीतों की प्रस्तुति की जिसे बहुत सराहा गया । या रब हमारे देश में बिटिया का मान हो, जेहन में बेटों जितना ही बेटी की शान हो तथा पढ़ लिख के लेहब जिंदगी सवार बाबा सहब हम ना दहेजवा के मार बाबा जैसे गीतों को बहुत सराहना मिली । कार्यक्रम के प्रारंभ में नीतू नवगीत ने सूर्यकांत त्रिपाठी निराला रचित सरस्वती वंदना वर दे वीणावादिनी प्रस्तुत किया । श्रोताओं की मांग पर उन्होंने कई कजरी और झूमर गीत भी गाए । कोयल बिना बगिया ना शोभे राजा, तुमको आने में तुमको बुलाने में कई सावन बरस गए साजना जैसे गीतों पर श्रोता खूब झूमे ।
गंगा मैया की अपार महिमा का उद्घोष करते हुए नीतू कुमारी नवगीत ने भरत सिंह भारती द्वारा रचित गीत चलली गंगोत्री से गंगा मैया जग के करे उद्धार और हे गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाइबो सैयां से कर दे मिलनवा हाय राम जैसे गीतों की प्रस्तुति दी । कार्यक्रम का संयोजन कवियित्री अंशु पाल ने किया । कार्यक्रम के दौरान प्रेरणा दर्पण की अध्यक्ष डॉ कीर्ति काले, डॉ कमलेश द्विवेदी, सुनीता पांडे सुरभि, प्रकाश हरि, एस एन एस मेहरा, विनय कुमार सक्सेना, प्रदीप कुमार प्राश, रचना उनियाल, नलिनी पुरोहित, आदि उपस्थित रहे । कार्यक्रम में सुजीत कुमार ने हारमोनियम पर, पिंटू कुमार ने पैड पर और दिनेश प्रसाद ने ढोलक पर संगत किया ।

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